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Sunday, 2 September 2018

Thathera Samaj

Thathera Samaj
भारत माता की जय
वन्दे मातरम 
जय हिन्द


हाँ..मैं मेहनतकश मजदूर/व्यापारी चोर हूँ..?
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" क्योंकि मैं रात-दिन खुद की रिस्क पर कमाता हूँ..सुबह से शाम तक काम मे जुटा रहता हूँ, इसलिये....
👉🏻 क्योकि मेरे दिये हुये टैक्स से उस शिक्षक को तनख्वाह मिलती है जो साल मे 200 दिन भी नहीं पढ़ाई कराता..!
👉🏻 क्योकि मेरे दिये पैसे से उस पुलिस को तनख्वाह मिलती है जो कभी समय पर नहीं मिलती..!
👉🏻 क्योंकि मेरे दिये टैक्स से उस डाक्टर को तनख्वाह मिलती है जो कभी अस्पताल नहीं जाता..!
👉🏻 क्योंकि मेरे दिये टैक्स से उस अफसर को तनख्वाह मिलती है जो हर काम पैसा खा कर करता है..!
👉🏻 मेरे दिये पैसे से ही मन्त्री विदेश यात्रा/मौज करते हैं...!

शासन सत्ता में बैठे हुए लोगों से हमारी बस इतनी सी गुजारिश है कि..हम चोर व्यापारियों को पकडने के लिये उन्ही अफसरों  को भेजना जिसने कभी पैसा न खाया हो, सदा ईमानदारी से काम किया हो...आपने गाना सुना होगा..
पहला पत्थर वो मारे जिसने पाप न किया हो जो पापी न हो..

हम व्यापारी तो चोर है...

हम टैक्स चोरी नहीं करते, टैक्स बचाते हैं, ये इसलिए ताकि हम अपने बच्चों और परिवार को भविष्य में किसी आकस्मिक आपदा से सुरक्षित रख सकें।

(1)हमने अपने घरों में हजारों रुपये खर्च कर जनरेटर/इन्वर्टर ख़रीदे !
- क्योंकि सरकार हमें नियमित रूप से बिजली उपलब्ध नहीं करा सकी।

(2) हमने submercible pump इसलिए लगाये !
- क्योंकि सरकार हमें शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं करा सकी।

(3) हमें private security guards इसलिए रखने पड़े
- क्योंकि सरकार हमें सुरक्षा देने में असमर्थ है ।

(4) हम private hospitals & नर्सिंग होम में जाने को विवश हुए  !
- क्योंकि सरकार ,सरकारी चिकित्सालयों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने में नाकाम रही ।
(5) हम कार, मोटरसाइकिल खरीदने को विवश हुए !
- क्योंकि सरकार, सार्वजनिक सस्ती परिवहन व्यवस्था बनाने में असफल रही।

और अंत में सरकार को टैक्स देने वालों को, उनके रिटायरमेंट के समय में, जब उसे अपनी जीवन रक्षा के लिए, सर्वाधिक सहायता की जरूरत होती है ? बदले में क्या मिलता है ?
कुछ नहीं !
सरकार से कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं।

लेकिन इसके विपरीत, उसके कठिन परिश्रम से अर्जित आय के स्रोतों का उपयोग सरकार, subsidy और गरीबों के कल्याण के नाम पर..

" उन लोगों के वोट खरीदने में खर्च कर देती है जो सरकार को एक पैसा भी टैक्स नहीं देते "

मुख्य बात ये है कि सरकार हमारे टैक्स के पैसों का क्या करती है..?
ट्रेन चलवाते हैं 
जो कभी समय से नहीं चलतीं ।

न्यायालय खोलती है
जहाँ न्याय तो मिलता है । लेकिन न्याय का इंतज़ार करते करते इंसान का दम टूट जाता है, लाखों मुकद्दमें 10--20 साल से ज्यादा समय तक लटके रहते हैं।

पुलिस स्टेशन चलाते हैं 
जो आम जनता की सुरक्षा के बजाय केवल राजनेताओं की सुरक्षा करती है ।

अस्पताल खोलते हैं 
जहाँ न दवाईयाँ मिलती हैं और न ही ढंग से चिकित्सा ही होती है।

सड़कों का निर्माण करवाते हैं 
जहाँ 40% से 60% राशि, ठेकेदार, बिचौलिए, नेताओं की जेब में चले जाते हैं।
यह सूची तो अंतहीन है...

पश्चिमी देशों की तरह, अगर हमारी केंद्र और राज्य की सरकारें, जनता के लिए उपरोक्त सुविधाएँ भली भांति उपलब्ध करा दें, तो कोई टैक्स चोरी भला क्यों करना चाहेगा..?

- यह हम सभी जानते हैं कि हमारे द्वारा दिए गए टैक्स का एक बहुत बड़ा हिस्सा, सरकारी कर्मचारियों और राजनेताओं पर खर्च हो जाता है
👉🏻 एक व्यापारी अपना माल मात्र 2% से 10% लाभ पर विक्रय करता है, जबकि सरकार अपने खर्च के लिए उसकी आय का 30% ले लेती है। 
यह कहाँ तक उचित है..?
यही कारण है कि कोई टैक्स देना नहीं चाहता।

हाँ..हम टैक्स बचाते हैं..लेकिन 
अपनी जरूरतों के लिए,परिवार के लिए,अपनी वृद्धावस्था के लिए, सुरक्षा के लिए..

देश की आजादी के 70 वर्षों के बाद भी, इस कुव्यवस्था एवं वर्तमान परिस्थियों के लिये केंद्र और राज्यों की सरकारें ही पूर्णतः  जिम्मेदार हैं।
👉🏻 प्रयास करें..हम मेहनतकश मजदूरों की वेदना देश के प्रधान सेवक तक पहुंचे..
एक मेहनत कश व्यापारी के हृदय की वेदना..


साभार  :- 

Pawan thathera


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