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Monday, 3 September 2018


ठठेरा समाज जिंदाबाद 
भारत माता की जय

मिशन : एक रुपया.. प्रतिदिवस..आओ हैहयवंश का नव-निर्माण करें..

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हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज को प्रेरित एवं संगठित करने के लिए अगर हम और आप चाहें तो मिलकर, एक नहीं कई अभिनव प्रयोगों की शुरूआत कर सकते हैं । आवश्यकता है तो बस इस बात की कि, हम अपने समाज के सर्वांगीण विकास एवं पुनुरुत्थान के प्रति किये जा रहे प्रयासों को लेकर कितने गंभीर एवं समर्पित हैं ।

    " मिशन : एक रूपया प्रतिदिवस " हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज के समग्र उत्थान का हमारा यह संकल्प लक्ष्य अगर  कामयाब रहा, तो निश्चित रूप से अन्य समाजों के लिए यह एक मिसाल बन सकता है। खास बात यह है कि, इस अभियान में समाज का हर व्यक्ति चाहे वह अमीर हो, मध्यमवर्गीय हो अथवा गरीब, एक ट्रस्टी की हैसियत में होगा । इसके लिए उसका योगदान होगा महज़ एक रुपया प्रतिदिवस । 
- जी हां !….सिर्फ और सिर्फ एक रुपया प्रतिदिवस । एक रूपया प्रतिदिवस अंशदान का हमारा यह संकल्प हमारे हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज के किसी भी वर्ग के व्यक्ति के लिये मुश्किल अथवा असंभव नहीं । आपको प्रतिदिवस मात्र एक रुपया का अंशदान करना है, और यदि आप क्षमतावान हैं, तो एक रूपये के गुणांक में एक, दो, पांच अथवा दस रुपये प्रतिदिन भी जमा करके अपने अपने नगर में इस अभिनव योजना को प्रायोगिक तौर पर शुरू कर सकते हैं, तदुपरांत प्रारंभिक स्वाजातीय सहयोग और सफलताओं के आधार पर इसे जिला, प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर तक ले जा सकते हैं । 

- एक रुपया प्रति दिवस अंश-दान योजना तो महज़ एक उदाहरण है अगर आप चाहें तो इसमें 30 रुपया माहवार से अपनी इक्क्षा-शक्तिनुसार भी योगदान कर सकते हैं। यह पैसा आप अपने अपने क्षेत्र की स्वजातीय संगठन ईकाई (श्री सहस्त्रार्जुन समाज कल्याण बैंक) के पास जमा कर सकते हैं और अगर चाहें तो इस सेवा कार्य के लिये अलग से कोई समिति का निर्धारण कर एक अतिरिक्त एकाउण्ट भी बना सकते हैं ।

- मेरी बात को सुनकर हो सकता है आप चौंक रहे हों…या आपको मेरी यह बात हजम नहीं हो रही हो ! आप सोच रहे होंगे कि भला एक रुपये की बिसात ही क्या ? परंतु इस अभिनव योजना को अमल में लाने के कुछ ही समय पश्चात आपको आशातीत सफलता मिलनी आरंभ हो जायेगी..

- अलग अलग सरनेम होने के कारण आज हमारा हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज भले ही संख्या बल की दृष्टि से देश के जातीय गणित में कोई स्थान न रखता हो । बावजूद इसके सच्चाई यह है कि सवा अरब की आबादी वाले हमारे देश में हैहयवंशीय क्षत्रिय  समाज की संख्या लगभग 4-5 करोड़ के आसपास है। लेकिन, भाषाई, क्षेत्रीय, रहन-सहन सहित मत-मतान्तरों के फलस्वरूप विभाजन के कारण, इनमें विभिन्न असमानताएं है, यही कारण है कि हम आज एक मंच पर नहीं हैं । दूसरी बात यह कि हमारे समाज में आर्थिक असमानताएं भी बहुत व्यापक हैं। आर्थिक वर्गभेद के कारण समाज कभी एकजुट सूरत में सामने नहीं आ पाया है । इसके विपरीत समाज की छिपी ताकतें भी हैं । मसलन 5 करोड़ की आबादी वाले इस समाज में 50 फीसदी युवा हैं जो अपनी स्थिति को बदलने और इस तरह समाज की स्थिति को बदलने का माद्दा रखते हैं । यानी ये युवा वर्ग समाज में असमानता की खाई को दूर करने और विभिन्न आधारों पर उसे एकजुट करने का साधन और साध्य, दोनों हैं।

- यदि हमारे हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज का हर व्यक्ति प्रतिदिवस एक रुपये का अंशदान करे, तो कोष में अच्छी खासी धनराशि एकत्र हो सकती है । यदि सभी एक रुपये दें तो प्रतिदिवस 5 करोड़ रुपये संग्रह होंगे । अब इस कोष को समाज के कमजोर आर्थिक वर्ग के ऊर्जावान युवाओं के उत्थान में इस्तेमाल किया जाए । उदाहरण के तौर पर वास्तविक पात्र को कारोबार के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है, जिसे बेहद मामूली ब्याज या फिर केवल मूलधन राशि की मियादी तरीके से किसी स्वजातीय बंधु की जमानत पर इस धनराशि की वापसी की शर्त पर दिया जा सकता है । इस योजना के माध्यम से हम अपने स्वजातीय साथी को उसके कारोबार को सफल बनाने में अपना अप्रत्यक्ष सामाजिक अंशदान दे सकते हैं । यानी कि उसके उत्पाद की मांग और आपूर्ति में समाज अहम योगदान कर सकता है । मसलन, एक युवा इस कोष से एक लाख रुपये लेकर कॉपी बनाने की यूनिट लगाता है, अब समाज के वे लोग जो स्टेशनरी का काम करते हैं, जो कापियां बेचते हैं, उस युवा की प्रेस में बनीं कॉपियों को अपनी दुकानों में रखे । इससे उस स्टार्टअप के सफल होने की संभावना अधिक होगी और कोष को पैसे की वापसी भी सुनिश्चित होगी । यह उदाहरण तो इस महज़ परिकल्पना का एक पक्ष है । लक्ष्य व्यापक है तो इसके आयाम भी व्यापक होंगे। प्रारंभिक तौर पर हम कुछ इस तरह के लक्ष्य भी तय कर सकते हैं -

- समाज के जरूरत मंद को स्वास्थ लाभ के लिए अनुदान

- समाज  युवक-युवतियों  को उच्च शिक्षा अथवा प्रशिक्षण कार्य के लिये सहायता अनुदान*
- समाज के बेरोजगार युवकों को रोजगार स्थापित करने के लिये अनुदान

- मातृशक्ति को आत्मनिर्भर बनाने के लिये सहायता अनुदान

- समाज की बेटी के विवाह में सहायता अनुदान

समाज के निशक्तजन की मदद हेतु अनुदान..
👉🏻 आवश्यकता अनुसार हम अन्य विकल्पों को भी इस योजना में शामिल कर सकते हैं..

नोट : एक रुपया प्रतिदिवस का लक्ष्य कोई चुनौती पूर्ण या दुर्गम नहीं, इसमें समाज के सभी वर्ग सरलता से शामिल हो सकते हैं.. अपितु इस अभिनव योजना में  पात्रता उसी को दी जाये, जो इस योजना के लिये न्यूनतम एक-रुपया का अंशदान करता हो एवं सहायता प्राप्त करने की पात्रता रखता हो ।


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