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Saturday, 8 September 2018

Monday, 3 September 2018

शक्ति स्थल के जीर्णोद्धार







शक्ति स्थल के जीर्णोद्धार का संकल्प : सागर एवं खुरई ताम्रकार समाज की एक सकारात्मक पहल..
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गढ़ौला जागीर (खुरई) : आज दिनांक 01/07/2018 दिन रविवार को हैहयवंशीय क्षत्रिय ताम्रकार समाज संगठन सागर एवं ताम्रकार समाज संगठन खुरई के संयुक्त तत्वाधान में, मध्यप्रदेश के सागर जिला अंतर्गत खुरई तहसील के सुमरेरी रेल्वे स्टेशन से मात्र 3 किलोमीटर दूर स्थित " सती चबूतरा " के नाम से प्रसिद्द हैहयवंशीय क्षत्रिय शक्ति स्थल, ग्राम गढ़ौला जागीर में सागर एवं खुरई के स्वाजातीय बंधु एकत्रित हुए ।
- उक्त हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज की धरोहर की साफ़-सफाई उपरान्त माता सती को सिंदूर चोला चढ़ाया गया, श्रृंगार पूजन हवन एवं प्रसादी वितरण की गई । इस सुअवसर पर उपस्थित स्वजातीय बंधुओं ने ध्वनिमत से " माता सती " चबूतरे (शक्ति स्थल) के जीर्णोद्वार एवं मंदिर निर्माण का संकल्प पारित कर दान-राशि की घोषणा की । 
- इस सुअवसर पर भोपाल से पधारे श्री लक्ष्मीनारायण "उपेन्द्र" जी ने बताया कि हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज की इस प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर का इतिहास मुगल कालीन लगभग 400 वर्ष पुराना है, यह पवित्र स्थल हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज में  वर्णित बड़वार (गोत्र-वंश) से संबद्ध है, साथ ही हम सभी के लिये एक पवित्र तीर्थ है, माता सती के शक्ति-स्थल पहुंचकर सच्चे मन से प्रार्थना करने वालों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं ।
- ग्राम गढ़ौला जागीर स्थित इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित कर इस पवित्र स्थल से लगे हुए " तमेरों का बगीचा " का भी निरीक्षण किया गया, जो सामाजिक देखरेख के अभाव में जीर्ण-शीर्ण स्थिति में बना हुआ है ।
- इस सुअवसर पर हैहयवंशीय क्षत्रिय ताम्रकार (कसेरा) समाज संगठन म.प्र.के मार्गदर्शक एवं प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य 
श्री लक्ष्मीनारायण "उपेन्द्र", 
श्री माखनलाल ताम्रकार सागर, 
श्री चंद्रकांत ताम्रकार खुरई, 
श्री नीलेश ताम्रकार खुरई, 
संभागीय अध्यक्ष श्री धन्नालाल जी ताम्रकार सागर, 
श्री रामेश्वर प्रसाद ताम्रकार (अध्यक्ष खुरई), 
श्री राममोहन ताम्रकार (उपाध्यक्ष), 
श्री प्रदीप ताम्रकार (अध्यक्ष- श्री सिंहवाहिनी माँ बगुलामुखी मंदिर ट्रस्ट ताम्रकार समाज खुरई), 
श्री गजानंद ताम्रकार, 
श्री मुरारीलाल शिवपुरिया, 
श्री श्रीकांत ताम्रकार, 
श्री गणेश ताम्रकार, 
श्री उमाशंकर ताम्रकार, 
श्री अनूप ताम्रकार, 
श्री सूर्यकांत ताम्रकार, 
श्री महेश वर्मा (मुन्ना), 
श्री प्रखर ताम्रकार (पचमढ़ी) 
श्री शिवराम ताम्रकार (अध्यक्ष), 
श्री मनीष ताम्रकार (वरिष्ठ उपाध्यक्ष), 
श्री दिलीप ताम्रकार (उपाध्यक्ष) 
श्री अनिल ताम्रकार (सचिव),  
श्री मुकेश ताम्रकार (सांस्कृतिक सचिव), 
श्री सनी ताम्रकार (उपाध्यक्ष), 
श्री नयन ताम्रकार (प्रवक्ता), 
श्री राजू ताम्रकार (काकगंज), 
श्री विजय ताम्रकार (बंडा), 
श्री राकेश ताम्रकार, 
श्री प्रतीक ताम्रकार, 
श्री हर्ष ताम्रकार, 
श्री निमेष ताम्रकार 
एवं बड़ी संख्या में स्वजातीय बंधु एवं बच्चे उपस्थित रहे । 
- उपस्थित स्वजातीय बंधुओं ने ध्वनिमत से इस प्राचीन हैहयवंशीय धरोहर को संरक्षित कर उचित रख-रखाव सहित माता सती के भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प  चार पारित किया ।, तत्संबंध में शीघ्र ही सागर एवं खुरई में सामाजिक बैठक कर सभी स्थानीय स्वजातीय परिवारों से इस पवित्र कार्य में सहयोग किये जाने का निवेदन किया जायेगा । शक्ति स्थल मंदिर निर्माण के लिये प्रारंभिक तौर पर श्री संतोष ताम्रकार (सिरोंज) द्वारा 8000/- खुरई से 21000/-  एवं सागर से 11000/- हजार की  तत्कालीन घोषणा इस कार्य हेतु की गई है जो की कार्य प्रारंभ होने के पश्चात् बढ़ाई जायेगी ।
- आप भी इस पूण्य कार्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर सकते हैं ।





Contact

पवन ठठेरा

मोबाइल नम्बर 7398311316

ठठेरा समाज जिंदाबाद 
भारत माता की जय

मिशन : एक रुपया.. प्रतिदिवस..आओ हैहयवंश का नव-निर्माण करें..

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हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज को प्रेरित एवं संगठित करने के लिए अगर हम और आप चाहें तो मिलकर, एक नहीं कई अभिनव प्रयोगों की शुरूआत कर सकते हैं । आवश्यकता है तो बस इस बात की कि, हम अपने समाज के सर्वांगीण विकास एवं पुनुरुत्थान के प्रति किये जा रहे प्रयासों को लेकर कितने गंभीर एवं समर्पित हैं ।

    " मिशन : एक रूपया प्रतिदिवस " हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज के समग्र उत्थान का हमारा यह संकल्प लक्ष्य अगर  कामयाब रहा, तो निश्चित रूप से अन्य समाजों के लिए यह एक मिसाल बन सकता है। खास बात यह है कि, इस अभियान में समाज का हर व्यक्ति चाहे वह अमीर हो, मध्यमवर्गीय हो अथवा गरीब, एक ट्रस्टी की हैसियत में होगा । इसके लिए उसका योगदान होगा महज़ एक रुपया प्रतिदिवस । 
- जी हां !….सिर्फ और सिर्फ एक रुपया प्रतिदिवस । एक रूपया प्रतिदिवस अंशदान का हमारा यह संकल्प हमारे हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज के किसी भी वर्ग के व्यक्ति के लिये मुश्किल अथवा असंभव नहीं । आपको प्रतिदिवस मात्र एक रुपया का अंशदान करना है, और यदि आप क्षमतावान हैं, तो एक रूपये के गुणांक में एक, दो, पांच अथवा दस रुपये प्रतिदिन भी जमा करके अपने अपने नगर में इस अभिनव योजना को प्रायोगिक तौर पर शुरू कर सकते हैं, तदुपरांत प्रारंभिक स्वाजातीय सहयोग और सफलताओं के आधार पर इसे जिला, प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर तक ले जा सकते हैं । 

- एक रुपया प्रति दिवस अंश-दान योजना तो महज़ एक उदाहरण है अगर आप चाहें तो इसमें 30 रुपया माहवार से अपनी इक्क्षा-शक्तिनुसार भी योगदान कर सकते हैं। यह पैसा आप अपने अपने क्षेत्र की स्वजातीय संगठन ईकाई (श्री सहस्त्रार्जुन समाज कल्याण बैंक) के पास जमा कर सकते हैं और अगर चाहें तो इस सेवा कार्य के लिये अलग से कोई समिति का निर्धारण कर एक अतिरिक्त एकाउण्ट भी बना सकते हैं ।

- मेरी बात को सुनकर हो सकता है आप चौंक रहे हों…या आपको मेरी यह बात हजम नहीं हो रही हो ! आप सोच रहे होंगे कि भला एक रुपये की बिसात ही क्या ? परंतु इस अभिनव योजना को अमल में लाने के कुछ ही समय पश्चात आपको आशातीत सफलता मिलनी आरंभ हो जायेगी..

- अलग अलग सरनेम होने के कारण आज हमारा हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज भले ही संख्या बल की दृष्टि से देश के जातीय गणित में कोई स्थान न रखता हो । बावजूद इसके सच्चाई यह है कि सवा अरब की आबादी वाले हमारे देश में हैहयवंशीय क्षत्रिय  समाज की संख्या लगभग 4-5 करोड़ के आसपास है। लेकिन, भाषाई, क्षेत्रीय, रहन-सहन सहित मत-मतान्तरों के फलस्वरूप विभाजन के कारण, इनमें विभिन्न असमानताएं है, यही कारण है कि हम आज एक मंच पर नहीं हैं । दूसरी बात यह कि हमारे समाज में आर्थिक असमानताएं भी बहुत व्यापक हैं। आर्थिक वर्गभेद के कारण समाज कभी एकजुट सूरत में सामने नहीं आ पाया है । इसके विपरीत समाज की छिपी ताकतें भी हैं । मसलन 5 करोड़ की आबादी वाले इस समाज में 50 फीसदी युवा हैं जो अपनी स्थिति को बदलने और इस तरह समाज की स्थिति को बदलने का माद्दा रखते हैं । यानी ये युवा वर्ग समाज में असमानता की खाई को दूर करने और विभिन्न आधारों पर उसे एकजुट करने का साधन और साध्य, दोनों हैं।

- यदि हमारे हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज का हर व्यक्ति प्रतिदिवस एक रुपये का अंशदान करे, तो कोष में अच्छी खासी धनराशि एकत्र हो सकती है । यदि सभी एक रुपये दें तो प्रतिदिवस 5 करोड़ रुपये संग्रह होंगे । अब इस कोष को समाज के कमजोर आर्थिक वर्ग के ऊर्जावान युवाओं के उत्थान में इस्तेमाल किया जाए । उदाहरण के तौर पर वास्तविक पात्र को कारोबार के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है, जिसे बेहद मामूली ब्याज या फिर केवल मूलधन राशि की मियादी तरीके से किसी स्वजातीय बंधु की जमानत पर इस धनराशि की वापसी की शर्त पर दिया जा सकता है । इस योजना के माध्यम से हम अपने स्वजातीय साथी को उसके कारोबार को सफल बनाने में अपना अप्रत्यक्ष सामाजिक अंशदान दे सकते हैं । यानी कि उसके उत्पाद की मांग और आपूर्ति में समाज अहम योगदान कर सकता है । मसलन, एक युवा इस कोष से एक लाख रुपये लेकर कॉपी बनाने की यूनिट लगाता है, अब समाज के वे लोग जो स्टेशनरी का काम करते हैं, जो कापियां बेचते हैं, उस युवा की प्रेस में बनीं कॉपियों को अपनी दुकानों में रखे । इससे उस स्टार्टअप के सफल होने की संभावना अधिक होगी और कोष को पैसे की वापसी भी सुनिश्चित होगी । यह उदाहरण तो इस महज़ परिकल्पना का एक पक्ष है । लक्ष्य व्यापक है तो इसके आयाम भी व्यापक होंगे। प्रारंभिक तौर पर हम कुछ इस तरह के लक्ष्य भी तय कर सकते हैं -

- समाज के जरूरत मंद को स्वास्थ लाभ के लिए अनुदान

- समाज  युवक-युवतियों  को उच्च शिक्षा अथवा प्रशिक्षण कार्य के लिये सहायता अनुदान*
- समाज के बेरोजगार युवकों को रोजगार स्थापित करने के लिये अनुदान

- मातृशक्ति को आत्मनिर्भर बनाने के लिये सहायता अनुदान

- समाज की बेटी के विवाह में सहायता अनुदान

समाज के निशक्तजन की मदद हेतु अनुदान..
👉🏻 आवश्यकता अनुसार हम अन्य विकल्पों को भी इस योजना में शामिल कर सकते हैं..

नोट : एक रुपया प्रतिदिवस का लक्ष्य कोई चुनौती पूर्ण या दुर्गम नहीं, इसमें समाज के सभी वर्ग सरलता से शामिल हो सकते हैं.. अपितु इस अभिनव योजना में  पात्रता उसी को दी जाये, जो इस योजना के लिये न्यूनतम एक-रुपया का अंशदान करता हो एवं सहायता प्राप्त करने की पात्रता रखता हो ।


Sunday, 2 September 2018








राजराजेश्वर भगवान श्री सहस्त्रार्जुन की निर्माणाधीन मूर्ति की मिट्टी से निर्मित प्रतिकृति..
- यह मूर्ति शुद्ध पीतल से निर्मित होगी, जिसका वजन लगभग 11 किलो होगा एवं ऊंचाई लगभग 15-18 इंच होगी..
- संपर्क करें : 
हैहयवंशी चंद्रकांत ताम्रकार
खुरई (जिला-सागर) म.प्र.
मोबाईल : 8319385628
वॉट्सएप्प : 9301953695


Thathera Samaj

ठठेरा समाज जिंदाबाद 


ठठेरा समाज के बारे मे जाने इस लिंक को ओपेन करे





Thathera Samaj

Thathera Samaj
भारत माता की जय
वन्दे मातरम 
जय हिन्द


हाँ..मैं मेहनतकश मजदूर/व्यापारी चोर हूँ..?
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" क्योंकि मैं रात-दिन खुद की रिस्क पर कमाता हूँ..सुबह से शाम तक काम मे जुटा रहता हूँ, इसलिये....
👉🏻 क्योकि मेरे दिये हुये टैक्स से उस शिक्षक को तनख्वाह मिलती है जो साल मे 200 दिन भी नहीं पढ़ाई कराता..!
👉🏻 क्योकि मेरे दिये पैसे से उस पुलिस को तनख्वाह मिलती है जो कभी समय पर नहीं मिलती..!
👉🏻 क्योंकि मेरे दिये टैक्स से उस डाक्टर को तनख्वाह मिलती है जो कभी अस्पताल नहीं जाता..!
👉🏻 क्योंकि मेरे दिये टैक्स से उस अफसर को तनख्वाह मिलती है जो हर काम पैसा खा कर करता है..!
👉🏻 मेरे दिये पैसे से ही मन्त्री विदेश यात्रा/मौज करते हैं...!

शासन सत्ता में बैठे हुए लोगों से हमारी बस इतनी सी गुजारिश है कि..हम चोर व्यापारियों को पकडने के लिये उन्ही अफसरों  को भेजना जिसने कभी पैसा न खाया हो, सदा ईमानदारी से काम किया हो...आपने गाना सुना होगा..
पहला पत्थर वो मारे जिसने पाप न किया हो जो पापी न हो..

हम व्यापारी तो चोर है...

हम टैक्स चोरी नहीं करते, टैक्स बचाते हैं, ये इसलिए ताकि हम अपने बच्चों और परिवार को भविष्य में किसी आकस्मिक आपदा से सुरक्षित रख सकें।

(1)हमने अपने घरों में हजारों रुपये खर्च कर जनरेटर/इन्वर्टर ख़रीदे !
- क्योंकि सरकार हमें नियमित रूप से बिजली उपलब्ध नहीं करा सकी।

(2) हमने submercible pump इसलिए लगाये !
- क्योंकि सरकार हमें शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं करा सकी।

(3) हमें private security guards इसलिए रखने पड़े
- क्योंकि सरकार हमें सुरक्षा देने में असमर्थ है ।

(4) हम private hospitals & नर्सिंग होम में जाने को विवश हुए  !
- क्योंकि सरकार ,सरकारी चिकित्सालयों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने में नाकाम रही ।
(5) हम कार, मोटरसाइकिल खरीदने को विवश हुए !
- क्योंकि सरकार, सार्वजनिक सस्ती परिवहन व्यवस्था बनाने में असफल रही।

और अंत में सरकार को टैक्स देने वालों को, उनके रिटायरमेंट के समय में, जब उसे अपनी जीवन रक्षा के लिए, सर्वाधिक सहायता की जरूरत होती है ? बदले में क्या मिलता है ?
कुछ नहीं !
सरकार से कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं।

लेकिन इसके विपरीत, उसके कठिन परिश्रम से अर्जित आय के स्रोतों का उपयोग सरकार, subsidy और गरीबों के कल्याण के नाम पर..

" उन लोगों के वोट खरीदने में खर्च कर देती है जो सरकार को एक पैसा भी टैक्स नहीं देते "

मुख्य बात ये है कि सरकार हमारे टैक्स के पैसों का क्या करती है..?
ट्रेन चलवाते हैं 
जो कभी समय से नहीं चलतीं ।

न्यायालय खोलती है
जहाँ न्याय तो मिलता है । लेकिन न्याय का इंतज़ार करते करते इंसान का दम टूट जाता है, लाखों मुकद्दमें 10--20 साल से ज्यादा समय तक लटके रहते हैं।

पुलिस स्टेशन चलाते हैं 
जो आम जनता की सुरक्षा के बजाय केवल राजनेताओं की सुरक्षा करती है ।

अस्पताल खोलते हैं 
जहाँ न दवाईयाँ मिलती हैं और न ही ढंग से चिकित्सा ही होती है।

सड़कों का निर्माण करवाते हैं 
जहाँ 40% से 60% राशि, ठेकेदार, बिचौलिए, नेताओं की जेब में चले जाते हैं।
यह सूची तो अंतहीन है...

पश्चिमी देशों की तरह, अगर हमारी केंद्र और राज्य की सरकारें, जनता के लिए उपरोक्त सुविधाएँ भली भांति उपलब्ध करा दें, तो कोई टैक्स चोरी भला क्यों करना चाहेगा..?

- यह हम सभी जानते हैं कि हमारे द्वारा दिए गए टैक्स का एक बहुत बड़ा हिस्सा, सरकारी कर्मचारियों और राजनेताओं पर खर्च हो जाता है
👉🏻 एक व्यापारी अपना माल मात्र 2% से 10% लाभ पर विक्रय करता है, जबकि सरकार अपने खर्च के लिए उसकी आय का 30% ले लेती है। 
यह कहाँ तक उचित है..?
यही कारण है कि कोई टैक्स देना नहीं चाहता।

हाँ..हम टैक्स बचाते हैं..लेकिन 
अपनी जरूरतों के लिए,परिवार के लिए,अपनी वृद्धावस्था के लिए, सुरक्षा के लिए..

देश की आजादी के 70 वर्षों के बाद भी, इस कुव्यवस्था एवं वर्तमान परिस्थियों के लिये केंद्र और राज्यों की सरकारें ही पूर्णतः  जिम्मेदार हैं।
👉🏻 प्रयास करें..हम मेहनतकश मजदूरों की वेदना देश के प्रधान सेवक तक पहुंचे..
एक मेहनत कश व्यापारी के हृदय की वेदना..


साभार  :- 

Pawan thathera